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Desh Bhakti Shayari

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Share kro jisse aap baat krte ho or jisse nhi krte…

मेरे मुल्क की हिफाज़त ही मेरा फ़र्ज है
और मेरा मुल्क ही मेरी जान है,
इस पर कुर्बान है मेरा सब कुछ,
नही इससे बढ़कर मुझको अपनी जान है।

तीन रंग का नही वस्त्र, ये ध्वज देश की शान है,
हर भारतीय के दिलो का स्वाभिमान है,
यही है गंगा, यही हैं हिमालय, यही हिन्द की जान है
और तीन रंगों में रंगा हुआ ये अपना हिन्दुस्तान हैं।

लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है,
उछ्ल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी।

वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियां रगड़ने दे,
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा।

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की नफरत,
मेरी मिटटी से भी खुशबू-ए-वफ़ा आयेगी।

भारतमाता तुम्हें पुकारे आना ही होगा,
कर्ज अपने देश का चुकाना ही होगा,
दे करके कुर्बानी अपनी जान की,
तुम्हे मरना भी होगा मारना भी होगा।

Desh Bhakti Shayari

मैं अपने देश का हरदम सम्मान करता हूँ,
यहाँ की मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे डर नहीं है अपनी मौत से,
तिरंगा बने कफ़न मेरा, यही अरमान रखता हूँ।

यहीं रहूँगा कहीं उम्र भर न जाउँगा,
ज़मीन माँ है इसे छोड़ कर न जाऊँगा।

भारतमाता के लिए मर मिटना कबूल है मुझे,
अखंड भारत बनाने का… जूनून है मुझे।

किसी गजरे की खुशबु को महकता छोड़ आया हूँ,
मेरी नन्ही सी चिड़िया को चहकता छोड़ आया हूँ,
मुझे छाती से अपनी तू लगा लेना ऐ भारत माँ,
मैं अपनी माँ की बाहों को तरसता छोड़ आया हूँ।
जय हिन्द…

जब आँख खुले तो धरती हिन्दुस्तान की हो:
जब आँख बंद हो तो यादेँ हिन्दुस्तान की हो:
हम मर भी जाए तो कोई गम नही लेकिन,
मरते वक्त मिट्टी हिन्दुस्तान की हो।

खुशनसीव हैं वो जो
वतन पे मिट जाते हैं,
मर कर भी वो लोग
अमर हो जाते हैं,
करता हूँ तुम्हे सलाम
ऐ वतन पर मिटने वालो,
तुम्हारी हर सांस में बसना
तिरंगे का नसीव है।
जय हिन्द..

मेरा यही अंदाज ज़माने को खलता है,
कि चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता है,
मैं अमन पसंद हूँ,
मेरे शहर में दंगा रहने दो,
लाल और हरे में मत बांटो,
मेरी छत पर तिरंगा रहने दो।

कुछ हाथ से मेरे निकल गया,
वो पलक झपक के छिप गया,
फिर लाश बिछ गयी लाखों की,
सब पलक झपक के बदल गया।
जब रिश्ते राख में बदल गए,
इंसानियत का दिल दहल गया,
मैं पूछ पूछ के हार गया,
क्यूँ मेरा भारत बदल गया?

बड़े अनमोल हे ये खून के रिश्ते
इनको तू बेकार न कर,
मेरा हिस्सा भी तू ले ले मेरे भाई
घर के आँगन में दीवार ना कर।

दोस्ताना इतना बरकरार रखो कि,
मजहब बीच में न आये कभी,
तुम उसे मंदिर तक छोड़ दो ,
वो तुम्हें मस्जिद छोड़ आये कभी।

Desh Bhakti Shayari

आज मुझे फिर इस बात का गुमान हो,
मस्जिद में भजन मंदिरों में अज़ान हो,
खून का रंग फिर एक जैसा हो,
तुम मनाओ दिवाली मेरे घर रमजान हो।

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, हैं दोनों इंसान,
ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ ले कुरान,
अपने तो दिल में है दोस्त, बस एक ही अरमान,
एक थाली में खाना खाये सारा हिन्दुस्तान।

दिल हमारे एक हैं एक ही है हमारी जान,
हिंदुस्तान हमारा है हम हैं इसकी शान,
जान लुटा देंगे वतन पे हो जायेंगे कुर्बान,
इसलिए हम कहते हैं मेरा भारत महान।

बस ये बात हवाओं को बताये रखना,
रौशनी होगी चिरागों को जलाये रखना,
लहू देकर जिसकी हिफाज़त की शहीदों ने,
उस तिरंगे को सदा दिल में बसाये रखना।

वतन की सर बुलंदी में, हमारा नाम हो शामिल,
गुजरते रहना है हमको, सदा ऐसे मुकामो से।

उनके हौसले का भुगतान क्या करेगा कोई,
उनकी शहादत का क़र्ज़ देश पर उधार है,
आप और हम इस लिए खुशहाल हैं क्योंकि,
सीमा पे सैनिक शहादत को तैयार हैं।

मुझे तन चाहिए न धन चाहिए,
बस अमन से भरा ये वतन चाहिए,
जब तक जिंदा रहूँ इस मात्रभूमि के लिए,
और जब मरू तो तिरंगा कफ़न चाहिए।

इश्क तो करता है हर कोई,
महबूब पर मरता है हर कोई,
कभी वतन को महबूब बना कर देखो,
फिर तुझ पर मरेगा हर कोई।

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे,
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे,
बची हो जो एक बूँद भी लहू की तब तक,
भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे।

लहराएगा तिरंगा अब नीले आसमान पर,
भारत का नाम होगा सबकी जुबान पर,
ले लेंगे उसकी जान या दे देंगे अपनी जान,
कोई जो उठाएगा आँख हमारे हिन्दुस्तान पर।

काले गोरे का भेद नहीं,
हर दिल से हमारा नाता है,
कुछ और न आता हो हमको,
हमें प्यार निभाना आता है।

खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,
मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,
करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों,
तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है…

जो अब तक ना खौला, वो खून नहीं पानी है,
जो देश के काम ना आये, वो बेकार जवानी है

सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा
हम बुलबुलें हैं उसकी वो गुलसिताँ हमारा।
परबत वो सबसे ऊँचा
हमसाया आसमाँ का
वो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा ……

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये….

लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा
मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा

मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए
बस अमन से भरा यह वतन चाहिए
जब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए
और जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये

  • जय-हिन्द *

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं

इतनी सी बात हवाओं को बताये रखना
रौशनी होगी चिरागों को जलाये रखना
लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने
ऐसे तिरंगे को हमेशा दिल में बसाये रखना

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे
बची हो जो एक बूंद भी लहू की
तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे

देशभक्तों से ही देश की शान है
देशभक्तों से ही देश का मान है
हम उस देश के फूल हैं यारों
जिस देश का नाम हिंदुस्तान है

मेरे देश तुझको नमन है मेरा,
जीऊं तो जुबां पर नाम हो तेरा
मरूं तो तिरंगा कफन हो मेरा

18: ये दुनिया….एक दुल्हन
ये दुनिया….एक दुल्हन…दुल्हन के माथे पे बिंदिया

लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर
भारत का ही नाम होगा सबकी जुबान पर
ले लेंगे उसकी जान या खेलेंगे अपनी जान पर
कोई जो उठाएगा आँख हिंदुस्तान पर

गुलाम बने इस देश को आजाद तुमने कराया है
सुरक्षित जीवन देकर तुमने कर्ज अपना चुकाया है
दिल से तुमको नमन हैं करते
ये आजाद वतन जो दिलाया है

कर जज्बे को बुलंद जवान, तेरे पीछे खड़ी आवाम !
हर दुश्मन को मार गिराएंगे, जो हमसे देश बँटवाएंगे !!

आन देश की, शान देश की, इस देश की हम संतान हैं !
तीन रंगों से रंगा तिरंगा, अपनी ये पहचान है !!

सीने में जूनून और आँखों में देशभक्ति की चमक रखता हूँ !
दुश्मन की सांसे थम जायें, आवाज में इतनी धमक रखता हूँ !!

इस वतन के रखवाले हैं हम
शेर ए जिगर वाले हैं हम
मौत से हम नहीं डरते
मौत को बाँहों में पाले हैं हम
वन्दे मातरम…

जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली
जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली
क्या लोग थे वो अभिमानी
है धन्य वो उनकी जवानी

देश के लिए मर मिटना कुबूल है हमें
अखंड भारत के सपने का जूनून है हमें

खींच दो अपने ख़ूँ से जमीं पर लकीर
इस तरफ आने पाये ना रावण कोई
तोड़ दो अगर कोई हाथ उठने लगे
छू ना पाये सीता का दामन कोई
राम भी तुम तुम्हीं लक्ष्मण साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

ऐ मेरे प्यारे वतन,
ऐ मेरे पिछड़े चमन
तुझ पे दिल कुर्बान

तेरे दामन से जो आये, उन हवाओं को सलाम
चूम लूँ मैं उस जुबां को जिस पे आये तेरा नाम
सबसे सुन्दर सुबह तेरी
सबसे सुन्दर तेरी शाम
तुझ पे दिल कुरबान
ऐ मेरे प्यारे वतन,
ऐ मेरे पिछड़े चमन
तुझ पे दिल कुर्बान।।

तिरंगा है आन मेरी
तिरंगा ही है शान मेरी
तिरंगा रहे सदा ऊँचा हमारा
तिरंगे से है धरती महान मेरी

सुन्दर है जग में सबसे, नाम भी सबसे न्यारा है
वो देश हमारा है, वो देश हमारा है

जहाँ जाति भाषा से बढ़कर देशप्रेम की धारा है
वो देश हमारा है, वो देश हमारा है

जिंदगी है कल्पनाओं की जंग
कुछ तो करो इसके लिए दबंग
जियो शान से भरो उमंग
लहराओ सबसे दिलों में देश के लिए तिरंग

अधिकार मिलते नहीं लिए जाते हैं
आजाद हैं मगर गुलामी किये जाते हैं
वंदन करो उन सेनानियों को
जो मौत के आँचल में जिए जाते हैं

उड़ जाती है नींद ये सोचकर
कि सरहद पे दी गयीं वो कुर्बानियां
मेरी नींद के लिए थीं

इश्क तो करता है हर कोई
महबूब पे तो मरता है हर कोई
कभी वतन को महबूब बना के देखो
तुझ पे मरेगा हर कोई

कर चले हम फ़िदा जाने तन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
….अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
कुछ नशा तिरंगे की आन का है,
कुछ नशा मातृभूमि की मान का है,
हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा,
नशा ये हिन्दुस्तान की शान का है….

उनके हौंसले का मुकाबला ही नहीं है कोई
जिनकी कुर्बानी का कर्ज हम पर उधार है
आज हम इसीलिए खुशहाल हैं क्यूंकि
सीमा पे जवान बलिदान को तैयार है….
हम अपने खून से लिखेंगे कहानी ऐ वतन मेरे,
करे कुर्वान हंस कर ये जवानी ऐ वतन मेरे,
दिली ख्वाइश नहीं कोई मगर ये इल्तजा बस है,
हमारे हौसले पा जाये मानी ऐ वतन मेरे।

गूंजे कहीं पर शंख , कहीं पे अजान है,
बाइबिल है, ग्रन्थ सहाब है,गीता का ज्ञान है,
दुनिया में कहीं और ये मंजर नसीब नहीं,
दिखा दो दुनिया को के ये हिन्दुस्तान है।

ऐ मेरे वतन के लोगो
तुम खूब लगा लो नारा,
ये शुभ दिन है हम सब का
लहराओ तिरंगा प्यारा,
पर मत भूलो सीमा पर
वीरों ने प्राण गवाए,
कुछ याद उन्हें भी कर लो
जो लौट के घर ना आये।

लड़े जंग वीरों की तरह,
जब खून खौल फौलाद हुआ |
मरते दम तक डटे रहे वो,
तब ही तो देश आजाद हुआ ||

चैन ओ अमन का देश है मेरा, इस देश में दंगा रहने दो
लाल हरे में मत बांटो, इसे शान ए तिरंगा रहने दो

दिलों की नफरत को निकालो
वतन के इन दुश्मनों को मारो
ये देश है खतरे में ए -मेरे -हमवतन
भारत माँ के सम्मान को बचा लो

मैं मुल्क की हिफाजत करूँगा
ये मुल्क मेरी जान है
इसकी रक्षा के लिए
मेरा दिल और जां कुर्बान है

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पे मर मिटनेवालों का बाकी यही निशां होगा

अनेकता में एकता ही इस देश की शान है,
इसीलिए मेरा भारत महान है

हमारी पहचान तो सिर्फ ये है कि हम भारतीय हैं – जय भारत, वन्दे मातरम

मैं भारतवर्ष का हरदम अमिट सम्मान करता हूँ
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

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